मां त्रिपुर सुंदरी केवल सौंदर्य की देवी नहीं, अपितु समस्त सृष्टि के आकर्षण और दिव्य माधुर्य की मूल शक्ति हैं। उनका स्वरूप ऐसा है जिसमें रूप, रस, तेज और सम्मोहन एक साथ प्रकट होते हैं। जो साधक उनकी शरण में जाता है, उसके भीतर एक अद्भुत परिवर्तन आरंभ होता है। उसका व्यक्तित्व निखरने लगता है, वाणी में प्रभाव आता है और उसके आसपास का वातावरण स्वयं ही आकर्षित होने लगता है। यह आकर्षण केवल बाहरी नहीं, अपितु आंतरिक तेज और आत्मबल का प्रस्फुटन होता है।
यदि आप अपने व्यक्तित्व में दिव्यता, आकर्षण और प्रभावशाली उपस्थिति बढ़ाना चाहते हैं, तो यह सरल साधना अत्यंत प्रभावकारी मानी गई है। प्रतिदिन घर से बाहर निकलने से पहले शुद्ध मन से कुंकुम की एक चुटकी लें। उसे अपने हाथ में धारण कर श्रद्धा से यह मंत्र 11 बार जप करें
“ॐ त्रिपुरे देवि महादेवि मम स्वरूपे आकर्षणं देहि देहि, मम कार्यं सिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा॥”
इसके पश्चात उसी कुंकुम से अपने मस्तक पर तिलक लगाएं। यह तिलक केवल एक चिह्न नहीं, अपितु आपके भीतर की शक्ति को जागृत करने का माध्यम बनता है। नियमित रूप से यह साधना करने पर साधक के भीतर आत्मविश्वास, आकर्षण और कार्यसिद्धि की शक्ति धीरे-धीरे प्रकट होने लगती है। मां त्रिपुर सुंदरी की कृपा से साधक का व्यक्तित्व ऐसा हो जाता है कि वह जहां भी जाता है, वहां उसकी उपस्थिति स्वयं ही प्रभाव छोड़ती है।

