Friday, April 10, 2026

🔴 आग्नेयिका मातृ – दिक्पाल मातृकाओं की अग्नि शक्ति 🔴

 


दश दिक्पाल मातृकाओं में पंचम स्थान पर विराजमान देवी आग्नेयिका मातृ अग्नि की आदिशक्ति हैं। उन्हें हौताशनी (लिङ्ग पुराण) और वैश्वानरी (शिव पुराण) नामों से भी जाना जाता है। यह देवी दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) की रक्षिका हैं, जहाँ से यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित होती है और समस्त शक्तियाँ जागृत होती हैं।


देवी आग्नेयिका वही तेजस्विनी शक्ति हैं जिन्होंने अन्य मातृकाओं के साथ मिलकर दैत्य जालंधर की सेना का संहार किया। उनका स्वरूप अत्यंत रहस्यमय और तांत्रिक है — वे छिन्नमस्ता महाविद्या की अंगविद्या मानी जाती हैं, और अग्नि के प्रचंड तत्त्व को धारण करती हैं।
उनका स्वरूप अद्भुत है —
सात भुजाएँ, दो मुख, तीन चरण, चार सींग, और सात जिह्वाएँ;
जटा-जूट से अलंकृत, विशाल उदर, उग्र किंतु प्रसन्न मुखमंडल;
हाथों में शक्ति, स्रुक, स्रुवा, भाला, पंखा और घृत-पात्र धारण करती हैं;
और उनका वाहन है मेंढा (राम) — जो अग्नि का प्रतीक है।
यह देवी होलिका (सिंहिका) के रूप से भी सम्बद्ध मानी जाती हैं, जो अग्नि की ही एक अन्य उग्र शक्ति हैं।
🔱 देवी आग्नेयिका स्तुति 🔱
अग्निज्वालास्वरूपिण्यै वैश्वानर्यै नमो नमः ।
हुताशन्यै महाशक्त्यै दिक्पालिन्यै नमो नमः ॥
सप्तजिह्वे द्विमुख्यै च त्रिपादायै नमोऽस्तु ते ।
रामवाहिनि रौद्रायै आग्नेय्यै ते नमो नमः ॥
जो साधक अग्नि तत्व की साधना में प्रविष्ट होते हैं, उनके लिए देवी आग्नेयिका मार्गदर्शक शक्ति हैं। यज्ञ, तंत्र और आंतरिक तेज को जागृत करने वाली यह मातृ, साधक के भीतर की जड़ता को भस्म कर उसे दिव्य ऊर्जा से भर देती हैं।
आग्नेयिका मातृ की उपासना से साधक को तेज, साहस, शुद्धि और अदृश्य संरक्षण प्राप्त होता है।

No comments:

Post a Comment

मां त्रिपुर सुंदरी

  मां त्रिपुर सुंदरी केवल सौंदर्य की देवी नहीं, अपितु समस्त सृष्टि के आकर्षण और दिव्य माधुर्य की मूल शक्ति हैं। उनका स्वरूप ऐसा है जिसमें रू...