तंत्र मार्ग में वर्णित कोकमुखी देवी एक अत्यंत गूढ़, उग्र और रहस्यमयी शक्ति का स्वरूप हैं। उनका स्वरूप साधारण देवी रूपों से भिन्न है—सियारमुखी (कोक-मुखी) यह रूप संकेत करता है उस शक्ति का, जो अंधकार, भय, मृत्यु और मायिक भ्रमों पर अधिकार रखती है।
वे साधक के भीतर छिपे भय, विकार और दुर्बलताओं का भक्षण कर उसे निर्भय और अडिग बनाती हैं। जिस प्रकार सियार रात्रि का स्वामी माना जाता है, उसी प्रकार कोकमुखी देवी रात्रि, तंत्र और गुप्त साधनाओं की अधिष्ठात्री हैं।
उनका रूप भयंकर होते हुए भी साधक के लिए अत्यंत करुणामयी है—जो उन्हें शरण में लेता है, उसके लिए वे रक्षा कवच बन जाती हैं।
॥ ध्यान ॥
श्यामवर्णा रक्तनेत्रा सियारमुखी भयंकरा।
खड्गमुण्डधरां देवीं कोकमुखीं नमाम्यहम्॥
रक्ताम्बरा रक्तमाला रुधिरासिक्त विग्रहा।
भूतप्रेतपिशाचघ्नी कोकमुखी नमोऽस्तुते॥
॥ कोकमुखी स्तोत्र ॥
नमस्ते कोकमुखि देवी उग्ररूपे भयङ्करि।
श्मशानवासिनि नित्यं तां नमामि पुनः पुनः॥
खड्गिनी शूलहस्ता च मुण्डमालाविभूषिता।
दुष्टसंहारिणी देवी त्राहि मां शरणागतम्॥
रक्तपानप्रिया देवी कालरात्रिस्वरूपिणी।
भूतदोषविनाशाय प्रसीद परमेश्वरि॥
माया मोह विनाशाय चित्तशुद्धिप्रदायिनी।
तां नमामि महादेवीं कोकमुखीं भयापहाम्॥
॥ विशेष महिमा ॥
कोकमुखी देवी की साधना विशेषतः उन साधकों के लिए कही गई है जो भय, प्रेतबाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति से मुक्ति चाहते हैं।
उनकी उपासना से—
साधक के भीतर अद्भुत साहस उत्पन्न होता है
भूत-प्रेत बाधाएं शांत होती हैं
गुप्त तांत्रिक सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं
मन स्थिर और निर्भीक बनता है
॥ रहस्य ॥
कोकमुखी देवी यह सिखाती हैं कि जो भयावह दिखता है, वही सबसे बड़ी शक्ति का द्वार भी हो सकता है।
जो साधक भय से भागता नहीं, बल्कि उसे साध लेता है—वही वास्तविक तंत्र का अधिकारी बनता है।
॥ नमन् ॥
जय कोकमुखी मातः
भय का अंत करने वाली
अज्ञान का नाश करने वाली
साधकों की रक्षक देवी को शत-शत प्रणाम॥
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